Jalaun News: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कालपी में अधिवक्ता गयादीन अहिरवार हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, करीब 32 बीघा जमीन के विवाद में अधिवक्ता की हत्या की साजिश रची गई थी। वारदात को अंजाम देने के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी दिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी मोनू यादव अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से स्विफ्ट डिजायर कार, तमंचे, कारतूस और वारदात में इस्तेमाल किया गया पाना रिंच बरामद किया है।
पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत के मुताबिक, 31 अक्टूबर को अधिवक्ता गयादीन अहिरवार को एक व्यक्ति फाइल पर चर्चा करने के बहाने अपने साथ ले गया था। इसके बाद चाय पीने के बहाने उन्हें गाड़ी में बैठाकर दूसरी जगह ले जाया गया।
काफी देर तक घर नहीं लौटने पर अधिवक्ता के बेटे ने उनकी तलाश शुरू की। करीब डेढ़ घंटे तक खोजबीन करने के बावजूद जब उनका कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कालपी थाना पुलिस, क्षेत्राधिकारी और पुलिस अधीक्षक की टीम सक्रिय हो गई। पुलिस ने शाम से लेकर पूरी रात कई स्थानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया और संदिग्धों से पूछताछ शुरू की।
पुलिस के अनुसार, शुरुआत में हिरासत में लिए गए संदिग्ध पुलिस को गुमराह करते रहे। हालांकि, लगातार पूछताछ के बाद सुबह करीब 9 बजे आरोपियों की निशानदेही पर अधिवक्ता के शव के संबंध में जानकारी मिली।
इसके बाद पुलिस ने तीन आरोपियों सर्वेश, आशीष और कटियार को गिरफ्तार किया। जांच आगे बढ़ने पर हत्या की साजिश में इंद्रजीत यादव की भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।
इस तरह पुलिस अब तक कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस मुख्य आरोपी मोनू यादव की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस की शुरुआती जांच में अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की हत्या के पीछे करीब 32 बीघा जमीन का विवाद सामने आया है।
बताया जा रहा है कि गयादीन अहिरवार और इंद्रजीत यादव पक्ष के बीच इस जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद और मुकदमेबाजी चल रही थी। पुलिस के अनुसार, विवादित जमीन लखीराम की दत्तक पुत्री के नाम से संबंधित बताई गई है। इसी जमीन पर दोनों पक्ष अपना दावा कर रहे थे।
पुलिस का दावा है कि इसी पुरानी रंजिश के चलते अधिवक्ता की हत्या की साजिश रची गई। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी मोनू यादव ने हत्या को अंजाम देने के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी दी थी।
इंद्रजीत यादव पर भी हत्या की साजिश में शामिल होने और सुपारी देने में भूमिका निभाने का आरोप है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल स्विफ्ट डिजायर कार बरामद करने के लिए पुलिस टीम जा रही थी। इसी दौरान रास्ते में आरोपियों ने पहले से छिपाकर रखे तमंचों से पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी।
पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें दो आरोपियों के पैर में गोली लगी। दोनों घायल आरोपियों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
इस घटना के बाद पुलिस ने बरामदगी और जांच की कार्रवाई आगे बढ़ाई।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और निशानदेही पर वारदात से जुड़े कई सामान बरामद किए हैं। इनमें शामिल हैं:
पुलिस इन बरामद वस्तुओं को जांच का हिस्सा बनाकर मामले की आगे की कार्रवाई कर रही है।
इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी बताए जा रहे मोनू यादव की गिरफ्तारी अभी बाकी है। पुलिस अधीक्षक ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।
इसके अलावा मोनू के पिता अजय यादव पर भी पूरी योजना में सहयोग करने का आरोप सामने आया है। पुलिस इस मामले में उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस को मोबाइल फोन से घटना से पहले और बाद की व्हाट्सएप चैट भी मिली हैं। इन चैट की जांच की जा रही है, ताकि हत्या की साजिश, आरोपियों के बीच बातचीत और उनकी भूमिका के संबंध में अन्य जानकारियां जुटाई जा सकें।
पुलिस के अनुसार, पूरे हत्याकांड में कुल छह लोगों की भूमिका सामने आई है। इनमें चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि तीन शूटरों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी, जबकि इंद्रजीत यादव की गिरफ्तारी के साथ गिरफ्तार आरोपियों की संख्या चार हो गई है।
मुख्य आरोपी मोनू यादव अभी फरार है। वहीं, अजय यादव की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।


